-मध्य रात्रि में पूजा का होगा विधान, रात्रि 11:30 से 12:30 का समय श्रेष्ठ
बक्सर खबर। शनिवार को घरों में नवमी की वार्षिक पूजा होगी। इसके लिए घर में विधिवत कलश स्थापित किया जाता है। लोग अष्टमी तिथि में इसकी स्थापना करते हैं। और मध्य रात्रि में महानिशा पूजा होती है। लोग अक्सर जानना चाहते हैं, कलश स्थापना का समय क्या है। शास़्त्रीय मान्यता के अनुसार प्रदोष काल में कलश स्थापित होना चाहिए। यह समय सूर्यास्त से 45 मिनट पहले प्रारंभ होता है और 45 मिनट बात तक प्रभावी होता है। ऐसा माना गया है, इस समय अवधि में महालक्ष्मी विचरण करती हैं। इसी लिए यह समय विशेष फल देने वाला माना जाता है।
वैसे पांच अप्रैल शनिवार को रात्रि 12:05 तक अष्टमी तिथि विद्यमान रहेगी। अर्थात इस समय से पूर्व कलश स्थापित हो सकता है। इससे जुड़ा दूसरा महत्वपूर्ण प्रश्न है, पूजा का समय? इसका जवाब है, यह पूजा महानिशा काल में करने का विधान है। जिसका समय रात्रि 11:30 से 12:30 (मध्यरात्रि) तक माना जाता है। इसी दौरान पूजा भी होनी चाहिए। इस एक घंटे के अंतराल में आपको अष्टमी और नवमी दोनों तिथियों का अंश मिलेगा। अतएव इस समय में ही पूजा करलेना श्रेयकर है। यह महत्वपूर्ण जानकारी पंडित नरोत्तम द्विवेदी ने बक्सर खबर को दी है।