बक्सर खबर। जिले में मतदान संपन्न हो गया है। कहीं री पोल की गुजाइंश नहीं बची। ऐसे में लिखने बोलने पर भी अब पाबंदी नहीं रही। भले ही आदर्श आचार संहिता मतगणना तक प्रभावी है। ऐसे में मुझे भी बतकुच्चन गुरु की याद आई। हमने उनसे संपर्क किया। चुनाव का हाल जानने के लिए उनको छेड़ा। वे बोले अरे विधायक कवनो बने। बहुत अंतर नहीं पड़ता है। पिछला पांच साल में कवन का किया। यह बात किसी से छिपी है। यहां तो चर्चा एके आदमी की हो रही है। तबकी चुनाव लड़ा था। जीते वाले कमाए नहीं पर उ मिला बचा के कमा लिया।
अबकी भी चुनाव लड़ा है। भले ही पार्टी बदलकर लड़ा है। चर्चा है एनकी बेर भी रुपया बचावे के लिए बड़का झूठ बोल रहा था। चुनाव लड़े बदे पार्टी रुपया देवे रही। लेकिन, ओसे कुछ लोग मिले। उ मनई इतना होशियार है। कहे लगा हम तो रुपया पार्टी के दान कर दिए हैं। का करते बचन दे दिए थे। आप हमरा सीट दीजिए, हम आपको जीत दिलाएंगे। इतना कहकर बतकुच्चन गुर हंसने लगे। बोले अइसन लोग विधायक बनेगा त का करेगा। भगवाने मालिक हैं। मैं भी उनकी बात सुन हंसने लगा। लेकिन जेहन में यह सवाल उठ रहा था। समाज में ऐसे भी लोग हैं। जो चुनाव लडऩे के बाद भी जीत से ज्यादा रुपये को महत्व देते हैं।
नोट-माउथ मीडिया बक्सर खबर का साप्ताहिक व्यंग कालम है। जो शुक्रवार को प्रकाशित होता है। आप अपने सुझाव हमें कमेंट के माध्यम से दे सकते हैं।